MAST KAHANIYA

जवानी से पहले ही जवानी को जानकार ,
खुद को 'काम ' की दीवानी सी मानकर ;
यौवन पे इतराती , लड़कों पे ध्यान धर ,
चलती रही अनजानी , जाने क्या ठान कर !!!


ही , मैं अंजलि ...! खैर छोडो ! नाम में क्या रखा है ? छिछोरे लड़कों को वैसे भी नाम से ज्यादा 'काम ' से मतलब रहता है . इसीलिए सिर्फ 'काम' की ही बातें करूंगी .


मैं आज 22 की हो गयी हूँ . कुछ बरस पहले तक में बिलकुल 'फ्लैट' थी .. आगे से भी .. और पीछे से भी . पर स्कूल बस में आते जाते ; लड़कों के कन्धों की रगड़ खा खा कर मुझे पता ही नहीं चला की कब मेरे कूल्हों और छातियों पर चर्बी चढ़ गयी .. बाली उम्र में ही मेरे नितम्ब बीच से एक फांक निकाले हुए गोल तरबूज की तरह उभर गए . मेरी छाती पर भगवन के दिए दो अनमोल 'फल ' भी अब 'अमरूदों ' से बढ़कर मोती मोती 'सेबों ' जैसे हो गए थे . मैं कई बार बाथरूम में नंगी होकर अचरज से उन्हें देखा करती थी .. छू कर .. दबा कर .. मसल कर . मुझे ऐसा करते हुए अजीब सा आनंद आता .. 'वहां भी .. और नीचे भी .


मेरे गोरे चित्ते बदन पर उस छोटी सी खास जगह को छोड़कर कहीं बालों का नमो -निशान तक नहीं था .. हल्के हल्के मेरी बगल में भी थे . उसके अलावा गर्दन से लेकर पैरों तक मैं एकदम चिकनी थी . क्लास के लड़कों को ललचाई नजरों से अपनी छाती पर झूल रहे 'सेबों ' को घूरते देख मेरी जाँघों के बीच छिपी बैठी हल्के हल्के बालों वाली , मगर चिकनाहट से भरी तितली के पंख फद्फदाने लगते और छातियों पर गुलाबी रंगत के 'अनार दाने ' तन कर खड़े हो जाते . पर मुझे कोई फरक नहीं पड़ा . हाँ , कभी कभार शर्म आ जाती थी . ये भी नहीं आती अगर मम्मी ने नहीं बोला होता ,"अब तू बड़ी हो गयी है अंजू .. ब्रा डालनी शुरू कर दे और चुन्नी भी लिया कर !"


सच कहूं तो मुझे अपने उन्मुक्त उरोजों को किसी मर्यादा में बांध कर रखना कभी नहीं सुहाया और न ही उनको चुन्नी से परदे में रखना . मौका मिलते ही मैं ब्रा को जानबूझ कर बाथरूम की खूँटी पर ही टांग जाती और क्लास में मनचले लड़कों को अपने इर्द गिर्द मंडराते देख मजे लेती .. मैं अक्सर जान बूझ अपने हाथ ऊपर उठा अंगडाई सी लेती और मेरी छातियाँ तन कर झूलने सी लगती . उस वक़्त मेरे सामने खड़े लड़कों की हालत ख़राब हो जाती ... कुछ तोह अपने होंटों पर ऐसे जीभ फेरने लगते मनो मौका मिलते ही मुझे नोच डालेंगे . क्लास की सब लड़कियां मुझसे जलने लगी .. हालाँकि 'वो ' सब उनके पास भी था .. पर मेरे जैसा नहीं ..


मैं पढाई में बिलकुल भी अच्छी नहीं थी पर सभी मास्टरों का 'पूरा प्यार ' मुझे मिलता था . ये उनका प्यार ही तोह था की होम -वर्क न करके ले जाने पर भी वो मुस्कुराकर बिना कुछ कहे चुपचाप कॉपी बंद करके मुझे पकड़ा देते .. बाकि सब की पिटाई होती . पर हाँ , वो मेरे पढाई में ध्यान न देने का हर्जाना वसूल करना कभी नहीं भूलते थे . जिस किसी का भी खली पेरिओद निकल आता ; किसी न किसी बहाने से मुझे स्ताफ्फ्रूम में बुला ही लेते . मेरे हाथों को अपने हाथ में लेकर मसलते हुए मुझे समझाते रहते . कमर से चिपका हुआ उनका दूसरा हाथ धीरे धीरे फिसलता हुआ मेरे नितम्बों पर आ टिकता . मुझे पढाई पर 'और ज्यादा ' ध्यान देने को कहते हुए वो मेरे नितम्बों पर हल्की हल्की चपत लगते हुए मेरे नितम्बों की थिरकन का मजा लूटते रहते .. मुझे पढाई के फायदे गिनवाते हुए अक्सर वो 'भावुक ' हो जाते थे , और चपत लगाना भूल नितम्बों पर ही हाथ जमा लेते . कभी कभी तोह उनकी उंगलियाँ स्किर्ट के ऊपर से ही मेरी 'दरार ' की गहराई मापने की कोशिश करने लगती ...


उनका ध्यान हर वक़्त उनकी थपकियों के कारन लगातार थिरकती रहती मेरी छातियों पर ही होता था .. पर किसी ने कभी 'उन् ' पर झपट्टा नहीं मारा . शायद 'वो ' ये सोचते होंगे की कहीं में बिदक न जाऊं .. पर मैं उनको कभी चाहकर भी नहीं बता पाई की मुझे ऐसा करवाते हुए मीठी मीठी खुजली होती है और बहुत आनंद आता है ...


हाँ ! एक बात मैं कभी नहीं भूल पाउंगी .. मेरे हिस्टरी वाले सर का हाथ ऐसे ही समझाते हुए एक दिन कमर से नहीं , मेरे घुटनों से चलना शुरू हुआ .. और धीरे धीरे मेरी स्किर्ट के अन्दर घुस गया . अपनी केले के तने जैसी लम्बी गोरी और चिकनी जाँघों पर उनके 'कांपते ' हुए हाथ को महसूस करके मैं मचल उठी थी ... ख़ुशी के मारे मैंने आँखें बंद करके अपनी जांघें खोल दी और उनके हाथ को मेरी जाँघों के बीच में ऊपर चढ़ता हुआ महसूस करने लगी .. अचानक मेरी फूल जैसी नाजुक योनी से पानी सा टपकने लगा ..


अचानक उन्होंने मेरी जाँघों में बुरी तरह फंसी हुयी 'कच्छी ' के अन्दर उंगली घुसा दी .. पर हड़बड़ी और जल्दबाजी में गलती से उनकी उंगली सीढ़ी मेरी चिकनी होकर टपक रही योनी की मोती मोती फांकों के बीच घुस गयी .. मैं दर्द से तिलमिला उठी .. अचानक हुए इस प्रहार को मैं सहन नहीं कर पाई . छटपटाते हुए मैंने अपने आपको उनसे छुड़ाया और दीवार की तरफ मुंह फेर कर कड़ी हो गयी ... मेरी आँखें दबदबा गयी थी ..


मैं इस सारी प्रक्रिया के 'प्यार से ' फिर शुरू होने का इन्तजार कर ही रही थी की 'वो ' मास्टर मेरे आगे हाथ जोड़कर खड़ा हो गया ,"प्लीज अंजलि .. मुझसे गलती हो गयी .. मैं बहक गया था ... किसी से कुछ मत कहना .. मेरी नौकरी का सवाल है ...!" इससे पहले मैं कुछ बोलने की हिम्मत जुटती ; बिना मतलब की बकबक करता हुआ वो स्टाफ रूम से भाग गया .. मुझे तड़पती छोड़कर ..





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पाठकों को आपकी अपनी अर्चना का नमस्कार ! आप लोगों के काफी सारे मेल मिले, मुझे ऐसी कई लड़कियों के मेल आये जो रंडी बनना चाहती थी।
मेरा उन्हें पहला सवाल यही था कि तुम मजे के लिए यह कर रही हो या फिर पैसों के लिए?
ज्यादातर लड़कियों ने जवाब दिया पैसों के लिए क्योंकि उनके घर वालों की हालत अच्छी नहीं है और वो उन्हें वो जिंदगी नहीं दे सकते जो वो चाहती हैं।
तो मैं पहले यह बता दूँ कि यह मेरा अपना अनुभव है कि घर वाले जितना देते हैं उसमें ही आपकी भलाई है, लेकिन फिर भी अगर आप करना चाहती हो, आपका स्वागत है।
कुछ मेल्स आये जो मजे के लिए करना चाहती थी, मैंने उन्हें तुरंत ज्वाइन कर लिया क्योंकि ऐसी लड़कियों को पैसों की कमी नहीं होती , बस मजे के लिए करना होता है तो यह काम में काफी अच्छी होती हैं।
मेरे पास एक मेल चडीगढ़ से आया, उसने कहा कि वो मुझसे मिलना चाहती है, तो मैंने पहले तो मना कर दिया तो उसने कहा कि उसने आज तक सेक्स नहीं किया है और उसकी शादी होने वाली है और शादी से पहले वो मुझसे अनुभव लेना चाहती है।
बहुत सोचने के बाद मैंने हाँ तो कह दिया मगर मैंने कहा- क्या सबूत है कि तुम लड़की हो?
तो उसने अपनी कुछ तस्वीरें भेजी। तस्वीरें किसी मॉडल की लग रही थी, मैं यही बात उसे कही और कहा- तुम अपनी कुछ ब्रा-पेंटी, कुछ सिगरेट पीते हुए और एक नंगी पिक्चर भेजो।
पहले तो उसने मना किया लेकिन शायद वो मुझसे मिलने को बहुत उत्सुक थी इसलिए उसने अपनी ब्रा-पेंटी और सिगरेट पीते हुए तस्वीर भेज दी और कहा कि नंगी तस्वीर नहीं भेज सकती।
मैंने कहा- कोई बात नहीं, ये भी ठीक हैं।
मैंने पूछा- हम कहाँ मिल सकते हैं?
तो उसने कहा- दो दिनों के लिए दिल्ली आ रही हूँ मैं, और अपनी फ्रेंड जो गुड़गाँव में रहती है, वहीं नौकरी करती है, उसके यहाँ ठहरूँगी। हम लोग वहीं उसके घर पर मिल सकते हैं।
मैंने हाँ कह दिया।
मैं भी देखना चाहती थी कि इतनी उत्सुक लड़की को जो मुझसे मिलने के लिए अपनी ऐसी तस्वीरें भेज सकती हैं।
मैंने यह भी साफ़ कर दिया कि मैं अपना नंबर नहीं दूंगी इस पर उसने कोई ऐतराज नहीं किया। अगले दिन उसका मेल आया
कि वो शुक्रवार को आ रही है। मैंने उसे गुड़गाँव के एम्बियंस मॉल बुला लिया वो भी सही समय पर पहुँच गई। यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉम पर पढ़ रहे हैं।
मिलते ही उसने मुझे उसने होंठों पर चुम्बन दिया, मैं भी हैरान थी क्योंकि मैंने आज तक किसी लड़की के साथ ऐसा नहीं किया था। उसका ड्रेसिंग सेंस कमाल का था कि वो कहीं से भी भारतीय नहीं लग रही थी, क्योंकि भारतीय लड़की कितनी भी मोडर्न हो जाए, वो कभी माइक्रो मिनी स्कर्ट और स्पेघैटी में घूमने में सहज महसूस नहीं करेगी। उसमें से उसके चूचे साफ़ झलक रहे थे, उसके साथ जो लड़की थी उसने सिंपल टी-शर्ट और जींस पहनी थी।
मैं तो उसका ड्रेसिंग सेन्स देखकर जलन महसूस कर रही थी, चुम्बन के बाद उसने मुझे अपना परिचय दिया, अपना नाम गुरविन्दर बताया।
इसके बाद उसकी सहेली ने अपना परिचय दिया कि उसका नाम पूनम है, वो भी चडीगढ़ से है और आजकल यहाँ गुडगाँव में नौकरी कर रही है।
इसके बाद हम तीनों काफी देर तक बातें करते रहे, बातों ही बातों में उसने मुझे बताया कि शादी वाली बात उसने मुझसे झूठ बोली थी क्योंकि वो मुझसे मिलना चाहती थी।
मैं उससे मिलकर बिल्कुल भी नाराज नहीं थी, पता नहीं क्यूँ।
मैंने उससे पूछा- तुम इतनी दूर से मुझसे मिलने क्यूँ आई हो?
उसने कहा- मेरे कॉलेज के कई लड़के उस पर मरते हैं मगर मुझे उनमें कोई दिलचस्पी नहीं है क्योंकि मैं एक लेस्बियन हूँ और मैं अपनी सहेली के साथ हर हफ्ते करती हूँ, कभी यह चडीगढ़ आती है और कभी मैं गुड़गाँव।
पहली बार मैं असहज महसूस कर रही थी। मैं समझ नहीं पा रही थी कि मैं उन दोनों को क्या जवाब दूँ।
बहुत सोचने के बाद मैंने कहा- मैंने आज तक लेस्बियन सेक्स नहीं किया है !
तो गुरविंदर बोली- हमारे साथ ट्राई कर लो !
गुरविंदर मुझे आमंत्रित कर रही थी। मैंने भी सोचा एक बार करने में कोई बुराई नहीं है और वो भी गुरविंदर जैसी बोल्ड लड़की के साथ। चूँकि गुरविंदर और पूनम को अनुभव था इसलिए मुझे परेशानी भी नहीं होगी।
मैंने उन्हें हाँ कह दिया।
इस पर गुरविंदर बोली- मैं यहाँ पर दो दिनों के लिए हूँ तो हम दो दिनों तक पूरा मजा ले सकते हैं।
मैंने भी साहिल को फोन करके बोल दिया कि मेरी एक दोस्त चंडीगढ़ से आई हुई है और गुडगाँव ठहरी है, मैं दो दिनों तक उसके घर रुकूँगी।
साहिल ने बिना कुछ पूछे हाँ कह दिया। इसके बाद हमने एक कैब बुलाई और रूम की तरफ चल दिए।
पूनम का घर काफी शानदार था, चूँकि वो किराए पर रहती थी तो मैंने नहीं सोचा था कि घर शानदार होगा। मैंने उस वक्त सादी सी साड़ी पहनी हुई थी क्योंकि मैंने नहीं सोचा था कि बात यहाँ तक जायेगी। इसलिए पूनम के घर पहुँचते ही मैंने पूनम से कोई दूसरी ड्रेस मांगी तो पूनम ने कहा- कपड़ों की क्या जरुरत है, यहाँ मेरे अलावा और कोई नहीं आता।
मैं अभी भी कुछ असहज महसूस कर रही थी क्योंकि यह मेरे लिए पहली बार था जब मैं किसी लड़की के साथ कुछ करने जा रही थी।
मैंने अपनी झिझक खोलने के लिए अपने कपड़े खोल दिए और ब्रा-पेंटी में आ गई, अपनी साड़ी उतार कर सोफे पर डाल दी।
इसके बाद मैं गुरविंदर की तरफ बढ़ी और जिस तरह से उसने मॉल में मेरे होंठों को चूमा था, मैं भी उसके होंठ चूमने लगी।
चूँकि गुरविंदर बहुत अनुभवी थी इसलिए उसने कब मुझे अपनी बाहों में जकड़ा और वो एक पंजाबी लड़की थी, दिखने में तो पतली थी मगर जब उसने मुझे जकड़ा तो मैं खुद को छुड़ाने में असमर्थ थी।
हम दोनों काफी देर एक-दूसरे को चूमते-चूसते रहे।
कुछ देर में हम दोनों अलग हुए तो गुरविंदर बोली- अगले दो दिनों तक हमें यही अर्चना चाहिए।
इसके बाद दोनों बोली- अब कुछ नाश्ता कर लेते हैं, फिर अगले दो दिनों तक यही करना है।
दोनों ने अपने सारे कपड़े उतारे और नंगी हो गई और मुझसे भी नंगी होने को बोला।
मैंने भी अपनी बची हुई इज्जत यानि कि अपनी ब्रा-पेंटी निकाल दी और हम तीनों रसोई में गए। रसोई में चिकन पका हुआ रखा था, मैंने कहा कि मैं यह सब नहीं खाती तो उन्होंने मेरे लिए कुछ बना दिया।
नाश्ता करने के बाद हम लोग खेल में वापिस उतर गए।
इस बार पूनम मेरी और बढ़ी और बोली- मैं वो चूत चाटना चाहती हूँ जिसने इतने सारे लौड़े खाए हैं।
मैं बेड पर जाकर लेट गई और अपनी चूत पूनम को पेश कर दी। पूनम मेरी तरफ बढ़ी और अपना मुँह मेरी चूत में घुसा दिया।
गुरविंदर इतने तक खाली बैठी थी। मगर कहते हैं कि पंजाबी ना खाली बैठते हैं और ना ही बैठने देते हैं।
गुरविंदर ने अपनी चूत मेरे मुंह की तरफ बढ़ाई और मैं उसकी चूत चाटने लगी। इतने में पूनम मेरी चूत से हट गई और अंदर कमरे में से कुछ डिल्डो (रबर या प्लास्टिक का लंड) उठा लाई।
गुरविंदर अभी तक मेरे मुँह से चिपकी हुई थी इसलिए मेरा पूरा ध्यान गुरविंदर की तरफ था। इतने में पूनम ने एक डिल्डो मेरी चूत में पेल दिया, मुझे ज्यादा फ़र्क नहीं पड़ा क्योंकि शायद डिल्डो ज्यादा मोटा नहीं था और मैं पहले ही इतने मोटे-मोटे लंड खा चुकी हूँ कि मुझे ज्यादा फ़र्क नहीं पड़ता।
इसके बाद गुरविंदर मेरे ऊपर से उठी, मैंने पूनम को पकड़ कर लिटा दिया और अपनी दो उँगलियों को उसकी चूत में घुसाने की कोशिश करने लगी क्योंकि पूनम अभी तक किसी मर्द से नहीं चुदी थी इसलिए उसकी चूत अभी भी कुछ टाईट थी।
मैंने रहम ना करते हुए एक डिल्डो उठाया, उसके ऊपर क्रीम लगाई और एक ही झटके में पूनम की चूत में घुसाने की कोशिश की। ज्यादा टाईट होने की वजह से डिल्डो ज्यादा अंदर गया ही नहीं बल्कि दर्द के मारे पूनम की चीख निकल गई।
फिर भी धीरे-धीरे अंदर घुसाने की कोशिश करने लगी। कुछ देर की कोशिश के बाद डिल्डो अंदर चला गया।
थोड़ी देर तक पूनम ऐसे ही लेटी रही मगर शायद वो दोनों मिलकर मुझे चोदना चाहती थी, गुरविंदर ने मुझे अपनी गिरफ्त में लिया और अपनी उँगलियों से मुझे चोदने लगी जिससे मुझे ज्यादा फ़र्क नहीं पड़ा। मगर कब उसने एक बहुत मोटा डिल्डो उठाया मुझे पता नहीं चला। पूनम ने मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए और गुरविंदर मेरे पावों पर लेटी हुई थी, उसने एक ही झटके में वो मोटा सा डिल्डो मेरी चूत में डालना चाहा। चूँकि डिल्डो काफी मोटा था जो मुझसे सहन नहीं हुआ और मैं चिल्लाने लगी और उन दोनों का विरोध करने लगी।
इसके बाद कुछ देर में वो भी सामान्य लगने लगा और इसके बाद बाजी मैंने अपने हाथों में ले ली। मैंने गुरविंदर की पकड़ को ढीला किया और अपनी पकड़ में जकड़ कर उसे लिटा दिया और पूनम से उसे पकड़ने को कहा। पूनम की पकड़ ढीली थी इसलिए मैंने पूनम से रस्सी लाने को कहा।
गुरविंदर ने यह सब शायद विडियो में देखा था मगर उसे अंदाजा नहीं था कि इसमें कितना दर्द होता है। गुरविंदर को बांधने के बाद मैंने सबसे मोटा डिल्डो उठाया तो गुरविंदर चिल्लाने लगी, बोली- यह मत डालना ! अरी ओ बहन की लौड़ी, वैसे तो बाप समान चाचा से चुद गई, भाई से चुद गई… अब मुझे चोदना चाहती है।
मैंने उसकी एक नहीं सुनी और वो मोटा डिल्डो गुरविंदर की चूत के पार कर दिया।
पूरा कमरा आ आआ अह आआह आआआह की आवाजों से गूँज उठा।
इसके बाद भी मैंने गुरविंदर की रस्सी नहीं खोली, मैं गुरविंदर पर मोहित हो चुकी थी क्योंकि वो काफी सुन्दर थी और सेक्सी भी।
मैंने गुरविंदर को टेढ़ा किया और अपनी उंगली उसकी गांड में डाली, उसे समझ आ चुका था कि अब मैं उसकी गांड से खिलवाड़ करने वाली हूँ तो उसने मुझे मना किया लेकिन अब मैं कहाँ सुनने वाली थी। मैंने वही डिल्डो उसकी गांड में भी घुसाने की कोशिश की मगर गांड काफी कसी थी इसलिए गया ही नहीं।
मैंने एक थोड़ा छोटा डिल्डो उठाया, उसकी गांड में क्रीम लगाई और फिर उसकी गांड में छोटा डिल्डो पेला तो वो घुस गया और पूरा कमरा फिर गुरविंदर की दर्द भरी चीखों आवाजों से गूँज उठा।
वो जितना चिल्लाती, मैं उतना ही बड़ा डिल्डो उसकी गांड में घुसाती। उसकी गाण्ड से खून निकलने लगा और बिस्तर खून से लाल हो गया, तब जाकर मैं रुकी।
मगर गुरविंदर चाहती थी मैं उसकी चूत चाटूँ, मैंने उसकी बात मानी और उसकी चूत चाटकर साफ़ कर दी। इसके बाद ऐसे ही मैंने पूनम को भी चोदा।
इसके बाद हम तीनों काफी देर तक ऐसे ही लेटे रहे और इसके बाद एक-दूसरे को बाथरूम में जाकर साफ़ किया और अगले दो दिनों तक एक-दूसरे के शरीर के साथ खेले। कभी गुरविंदर मुझको तो कभी मैं उसको कभी हम दोनों मिलकर पूनम को चोदते।
इस तरह हम तीनों का लेस्बियन चुदाई का कार्यक्रम चलता रहा।
दूसरे दिन शाम को मैंने उनसे विदा मांगी और दुबारा मिलने का कहा।
लेकिन सच में मेरा पहला लेस्बियन सेक्स मुझे हमेशा याद रहेगा और मेरे साथ किया हुआ मजा उन दोनों भी हमेशा याद रहेगा क्योंकि हमेशा गुरविंदर पूनम को चोदती थी मगर पहली बार गुरविंदर इस तरह से किसी से चुदी थी।
आपको मेरा यह अनुभव कैसा लगा, जरूर बताइयेगा !
इसके बाद भी मेरी जिंदगी शांत नहीं हुई और क्या-क्या हुआ जरूर बताऊँगी।

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मैं अपनी कहानी अब आगे बढ़ाती हूँ। जिन लोगों ने अब तक मेरी कहानी नहीं पढ़ी मैं उनसे आग्रह करती हूँ कि इस कहानी का पूरा मजा लेने के लिए कृपा करके मेरी पहले की कहानियाँ ‘मेरी शुरुआत’ और भाई की रखैल जरूर पढ़ें।
अपने भाई यश से एक बार चुदने के बाद हमारा यह खेल रोजाना चलने लगा, इसी बीच मेरा कॉलेज खत्म हो गया। कॉलेज के फेयरवेल के दिन मैं और वाणी साड़ी पहन कर कॉलेज गए, मुझे यश को अपनी कार की चाबी देनी थी इसलिए मैंने यश को फोन करके पूछा तो उसने बताया कि वो अपने कॉलेज में है। मैं बताना भूल गई हम दोनों अलग-अलग कॉलेज में पढ़ते थे, माफ कीजियेगा नाम नहीं बता सकती।
जब मैं यश को चाबी देने पहुँची तो वो अपने दोस्तों के साथ खड़ा था। मुझे देखते ही उसके दोस्त लार टपकाने लगे और मुझे घूर- घूर कर देखने लगे। चूँकि यश वहीं खड़ा था इसलिए किसी की हिम्मत नहीं हुई कि मुझसे कोई बात कर सकें।
कॉलेज खत्म होने के बाद मेरा घर से बाहर निकलना लगभग बंद ही हो गया, मैं बस शॉपिंग करने और किसी जगह घूमने जाना हो तभी बाहर निकलती थी। इसी बीच मेरे लिए एक घर से रिश्ता आया, लड़के का नाम साहिल था, लड़के वाले वैसे तो राजस्थान से थे मगर आजकल दिल्ली में हौजखास एरिया में रहते थे। मैं बता दूँ हौजखास दिल्ली का सबसे पोश इलाका है, लड़के वाले बहुत अमीर थे इसलिए मेरे माता-पिता ने तुरंत हाँ बोल दी।
लड़के वाले बहुत अमीर थे इसलिए मेरे चाचा ने भी वाणी के लिए साहिल के छोटे भाई गौरव का रिश्ता माँगा जिसे लड़के वालों ने सहर्ष स्वीकार कर लिया।
जब मेरे रिश्ते की बात यश ने सुनी तो वो आगबबूला हो गया, उस रात जब यश मेरे कमरे में आया उसने बहुत शराब पी रखी थी, शराब के नशे में यश ने मुझे जमकर चोदा। जब सुबह यश होश में आया तो मैंने यश से वादा लिया कि आज के बाद हम दोनों एक-दूसरे के साथ सेक्स नहीं करेंगे और ना ही यश वाणी को चोदेगा क्यूंकि उसकी भी शादी होने वाली है और वो मेरी होने वाली देवरानी है।
यश ने मान लिया और मुझसे वादा किया वो आज के बाद ऐसा नहीं करेगा।
यश से वादा लेने की बात मैंने वाणी को बताई तो उसने भी मुझे सराहा और बोली- अच्छा हुआ कि तुमने बात कर ली वर्ना मुझे तो समझ नहीं आ रहा था कि मैं यश से कैसे बात करूँगी।
हम दोनों की शादी की बात पक्की हो चुकी थी मगर ना ही अब तक मैंने और ना ही वाणी ने लड़कों की फोटो देखी थी इसलिए मैंने पापा और वाणी से साहिल और गौरव से मिलने की जिद की, जिसे उन्होंने मान लिया।
मैंने साहिल को फोन किया और उसे नेताजी सुभाष प्लेस के मेट्रो स्टेशन पर बुलाया, जब मैं साहिल से मिली तो मैं बहुत खुश हुई क्योंकि साहिल देखने में काफी सुन्दर था और एक बलिष्ठ शरीर का मालिक भी था। मुझे लगा अब मुझे कहीं बाहर मुँह मारने की जरुरत नहीं होगी।
कुछ वक्त साथ बिताने के बाद मैंने साहिल से विदा मांगी तो साहिल बोला- तुम मेरी होने वाली पत्नी हो, तुम बस के धक्के खाओ, अच्छा नहीं लगता !
साहिल ने किसी को फोन मिलाया और थोड़ी ही देर में एस.यू.वी. हमारे सामने थी। मैं और साहिल पीछे बैठ गए और ड्राईवर कार चला रहा था। सबसे पहले साहिल ने मेरे कंधे पर हाथ रखा, यह मेरे लिए कोई नया नहीं था और मैं जानती थी कि साहिल क्या करना चाहता है मैंने कोई विरोध नहीं किया और धीरे-धीरे मेरे होंठो की तरफ बढ़ा और मेरे होंठों को चूम लिया।
मैंने कोई विरोध नहीं किया, मगर फिर भी साहिल मुझे सॉरी बोलने लगा।
मैंने कहा- कोई बात नहीं ! कुछ ही दिनों में हमारी शादी होने वाली है और मैं तुम्हारी होने वाली पत्नी हूँ।
इसके बाद साहिल मेरे टॉप के ऊपर से मेरे बूब्स दबाने लगा तो मैंने तुरंत ही उसे हटा दिया, मैंने सोचा कहीं उसे यह ना लगे कि मैं चरित्रहीन हूँ।
थोड़ी ही देर में मेरा घर आ गया, साहिल शरमा रहा था इसलिए मैं खुद ही उसे गुडबाय किस दे दिया।
उस शाम में ही मैंने साहिल को अपना दीवाना बना दिया था।
शाम को मैंने और वाणी ने अपना अनुभव एक-दूसरे से बांटा, वाणी ने बताया कि गौरव दिखने में अच्छा नहीं है और काफी पतला भी है, वाणी शायद गौरव से खुश नहीं थी लेकिन उसने बताया कि गौरव बिलकुल शर्मीला नहीं है जैसा कि साहिल है।
कुछ ही दिनों में मेरी और वाणी की सगाई थी, घर में सगाई की तैयारियाँ जोर-शोर से चल रही थी। आखिर वो दिन भी आ गया जो हर लड़की कि जिंदगी में जरुरी होता है, सगाई के दिन मैंने पहली बार गौरव को देखा, गौरव सच में पतला था। चूँकि लड़के वाले बहुत अमीर थे इसलिए वो चाहते थे कि शादी का पूरा खर्चा वो करें, उन्हें तो बस लड़की चाहिए थी, इसलिए उनकी तरफ से बहुत सी ज्वैलरी आई उन्होंने एक बहुत महंगी साड़ी भी मेरे लिए भेजी।
सगाई किसी तरह अच्छे से निपट गई, सगाई की थकावट में पूरा शरीर टूट रहा था इसलिए मैं अपने कमरे मे गई और सिगरेट के कश का आनन्द लेने लगी।
तभी यश मेरे कमरे में आया और कमरे में घुसते ही दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और मुझसे बोला- कम से कम दरवाजा तो बंद कर लेती !
मैंने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया और सिगरेट का आनन्द लेती रही, कब यश ने मेरे पीछे आकर मेरी कमर में अपने हाथ डाल दिए मुझे पता नहीं लगा। यश ने थोड़ी पी रखी थी, मैंने उसे पीछे धकेला और कहा- तुमने वादा किया था कि हम सिर्फ भाई-बहन की तरह रहेंगे ना कि पति-पत्नी की तरह।
तभी बाहर से दरवाजा बजा, मैंने तुरंत सिगरेट बाहर फेंक दी।
बाहर साहिल खड़ा था, जैसे ही साहिल अंदर घुसा तो उसने यश से कहा- सिगरेट पीना अच्छी बात नहीं है।
यश कुछ नहीं बोला और अपनी गर्दन नीचे कर ली। मैं समझ गई कि साहिल बहुत शरीफ लड़का है, मैंने निश्चय कर लिया कि मैं उसके लायक बनने की कोशिश करुँगी। साहिल और उसके घरवाले सब काम निबटने के बाद वहाँ से चले गए।
अगले ही दिन यश पापा से कहीं घूमने जाने के लिए अनुमति मांग रहा था, मैं भी सगाई के कारण काफी थक गई और मैं भी कहीं घूमने जाना चाहती थी। मगर यश अपने दोस्तों के साथ जा रहा था तो मैंने सोचा मैं तो वहाँ बोर हो जाऊँगी इसलिए मैंने यश से नहीं पूछा।
मगर कुछ देर बाद यश खुद ही मुझसे पूछने मेरे कमरे में आया तो मेरे मन में भी लालसा जाग गई और मैंने हाँ बोल दिया।
पापा तो वैसे भी मेरे हाथों की चाभी बन चुके थे तो उन्होंने निस्सकोच हाँ कह दिया।
अगले दिन सुबह ही उन लोगों का घूमने जाने का प्लान था, मैंने उनसे यह तक नहीं पूछा था कि वे लोग घूमने कहाँ जा रहे हैं। सुबह-सुबह दो कारें हमारें घर के सामने रुकी, उसमें से यश के 8 दोस्त बाहर आये। मैंने उन लोगों को देख पूछा कि तुम्हारे ग्रुप की कोई लड़की नहीं जा रही?
तो यश बोला- हम तो लड़के-लड़के जा रहे थे। मुझे लगा तुम मना कर दोगी इसलिए किसी लड़की को नहीं बुलाया।
चूँकि मैंने जाने की पूरी तैयारी कर ली थी और मेरा घूमने का मन भी था तो मैंने प्लान कैंसल करना उचित नहीं समझा। इसके बाद पापा को बोल कर मैंने और यश ने हमारी कार निकली और मनाली चल दिए।
रास्ते में एक जगह पर हमने कार रोकी और हम सब बाहर आये तो मैंने यश के बाकी सारे दोस्तों को देखा, तब मुझे याद आया कि ये सब तो वही है जो मुझे देख कर फेयरवेल के दिन लार टपका रहे थे।
लेकिन मैंने उस बात को इग्नोर कर दिया। मुझे लगा हम मनाली में किसी होटल में रुकेंगे, मगर हमारी कार एक घर के सामने रुकी। यश बोला- यह हमारे एक दोस्त का घर है, हमें यहाँ कोई परेशानी नहीं होगी और हमारे होटल के पैसे भी बच जायेंगे जो हम कहीं और खर्च कर सकते हैं।
मुझे सुझाव अच्छा लगा, उस घर में चार कमरे थे। एक कमरा उन लोगो ने मुझे दे दिया और बाकी नौ जने बचे हुए तीन कमरों में एडजस्ट हो गए।
मैं सफर के कारण काफी थक गई थी इसलिए मैंने सबसे पहले स्नान किया और फ्रेश होकर बाहर आ गई। यश के 3 दोस्त वहीं बाहर बैठे थे।
मैं नहीं चाहती थी यश के दोस्त मुझसे अनजान रहे और मैं उनके लिए अजनबी, इसलिए मैंने खुद ही दोस्ती बढ़ाने की पहल की और खुद उनसे जाकर बात करने लगी। कुछ ही देर में मुझे ठण्ड लगने लगी और मैं ठिठुरने लगी तो यश के एक दोस्त कपिल ने मेरे सामने सिगरेट कर दी और बोला- ब्राण्डी तो खत्म हो गई है, तुम चाहो तो यह ट्राई कर सकती हो।
मैंने कहा- मैं स्मोक नहीं करती !
तो उसने कहा- माफ करना, ठण्ड ज्यादा थी इसलिए ब्राण्डी खत्म हो गई लेकिन सिगरेट ट्राई करने में कुछ बुरा नहीं है।
वो मुझे जोर देकर कहने लगा तो मैंने भी सिगरेट स्वीकार कर ली।
तभी अंदर से यश और उसके बाकी तीन दोस्त हँसते हुए बाहर आये और बोले- कपिल यार, तू शर्त जीत गया, तूने अर्चना को सिगरेट के लिए राजी कर ही लिया।
मैं समझ गई कि यहाँ क्या हो रहा था। इसके बाद मैं भी उनके गैंग का हिस्सा बन गई और मेरी उन सबसे अच्छी दोस्ती हो गई।
दो दिन कब गुजर गए पता ही नहीं चला, चूँकि हम वहाँ सात दिनों के लिए आये थे। तीसरे दिन शाम को हम सभी ट्रुथ और डेअर खेल रहे थे, जैसे ही सबसे पहले बोतल घुमाई तो वो मेरी तरफ रुकी, तो मैंने डेअर बोल दिया तो सबने मुझसे मॉडल की तरह चलने को बोला।
जब मैं वॉक कर रही थी मैंने देखा कि सबके लंड खड़े हो गए थे।
इसी तरह हम काफी देर तक खेलते रहे। एक बार जब बोतल यश की तरफ रुकी तो उसने ट्रुथ(सच) कह दिया।
तो कपिल ने कहा- कुछ ऐसा अपने बारे में बताओ जो हमें ना पता हो।
यश काफी देर तक सोचता रहा, फिर उसने जो बोला उसे सुनकर मैं दंग रह गई, उसने सबके सामने बोल दिया कि उसके मेरे साथ जिस्मानी सम्बन्ध रह चुके हैं।
शर्म के मारे मैं वहाँ बैठ नहीं पाई और उठकर वहाँ से चली आई।
अगली सुबह जब मैं उठी तो उन सबसे आखें नहीं मिला पा रही थी, मैं सीधा उस कमरे में गई जिसमे यश था। मेरे अंदर घुसते ही बाकी सब बाहर निकल गए, मैं बहुत गुस्से में थी, मैं कुछ बोलती उससे पहले ही यश बोला- मैंने बहुत पी ली थी और दिमाग काम नहीं कर रहा था, जो दिमाग में आया वही बोल दिया।
मैंने भी फिर कुछ नहीं बोला क्योंकि जो होना था वो हो चुका था और मैं वापिस अपने कमरे में आ गई।
मुझे अपने कमरे में बहुत ठण्ड लग रही थी तो मैंने यश के दूसरे दोस्त राजीव से ब्राण्डी मांगी तो उसने भी सिगरेट का पैकेट पकड़ा दिया और बोला- सॉरी, आज ब्राण्डी लाये ही नहीं ! हम लोग भी सिगरेट से काम चला रहे हैं।
मैंने सिगरेट का पैकेट लिया और अपने कमरे माँ आकार सिगरेट फ़ूंकने लगी। उस पूरे दिन मैं अपने कमरे में रही, मैं चाहती थी कब ये छुट्टियाँ खत्म हों और मैं अपने घर जाऊँ।
उस दिन शाम को मुझे बहुत ठण्ड लग रही थी और सिगरेट भी खत्म हो चुकी थी। मैंने जाकर राजीव से ब्रांडी या सिगरेट मांगी तो वो बोला कि दोनों ही खत्म हैं।
चूँकि मैं पहली बार मनाली आई थी और वो भी ठण्ड में, तो मुझसे ठण्ड बर्दाश्त नहीं हो रही थी। मुझे लगा मैं तो इस ठण्ड में मर ही जाऊँगी तो मैंने सोचा मैं पहले भी यश से चुद चुकी हूँ, एक बार और चुद लूंगी तो क्या फ़र्क पड़ेगा, इसलिए मैं यश के कमरे की तरफ गई तो देखा यश सो रहा था,
मैंने यश को जगाने कीकोशिश कि मगर यश जगा नहीं। मैं वापिस अपने कमरे में आ गई लेकिन मेरे पास ठण्ड का कोई इलाज नहीं था। मैं समझ गई कि मुझे यश के किसी दोस्त से ही अपनी प्यास बुझानी पड़ेगी ताकि मेरी ठण्ड का इलाज हो जाए।
मैंने एक सेक्सी सी काले रंग की झीनी सी नाईटी पहनी जो बिल्कुल पारदर्शी थी, अब मेरी ठण्ड जा चुकी थी और मेरा पूरा ध्यान यश के दोस्तों को रिझाने का था। मैं यश के कमरे में गई जहाँ कोई नहीं था, ढूंढने पर मुझे एक सिगरेट मिल ही गई, मैंने दूसरे कमरे में घुसने से पहले ऊँची ऐड़ी की सेंडल पहनी और सिगरेट जलाई और बड़े ही कामुक अंदाज में दूसरे कमरे में प्रवेश किया। यश के दो दोस्त, सुमित और संजय उस कमरे में थे, मैंने कोई परवाह नहीं की और उनके कमरे में घुस गई।
सुमित उठा और उठकर कमरे का दरवाजा बंद कर दिया। जैसे ही उसने मेरी कमर पर हाथ लगाने की कोशिश की, मैंने उसके बाल पकड़े और धक्का दे दिया और खड़ी-खड़ी अपनी टांगों पर हाथ फिराने लगी। मेरी इन हरकतों को देखकर संजय पागल हो उठा और अपना लौड़ा निकाल कर मुठ मारने लगा।
मैं उसके पास गई और उसका लौड़ा पकड़कर आगे-पीछे करने लगी। संजय का शरीर पूरा गर्म हो चुका था और उसका झड़ने वाला था। वो मुझे हाथ लगाता, उससे पहले ही मैंने उसे रोक लिया और कहा- अब मेरी शादी होने वाली है, और यह मेरी आखिरी गैर मर्द से चुदाई है तो मैं चाहती हूँ कि तुम सभी आठ लोग मिलकर मुझे एक साथ चोदो और वो भी यश के सामने।
सुमित जाकर बाकी छ: को भी बुला लाया तो मैंने अपनी इच्छा के बारे में बताया। इसके बाद वो लोग यश को उठा लाये और लाकर कुर्सी से बाँध दिया।
कुर्सी से बांधने के बाद राजीव ने यश के ऊपर पानी फेंका जिससे उसकी आँखें खुल गई मगर कमरे का नजारा देखकर वो हैरान रह गया। उस वक्त मैं संजय की बाहों में थी, वो चिल्लाता रहा मगर मैंने कहा- तुम्हारी वजह से इन लोगों को हमारे बारे में पता चला और अगर मैं इनके साथ सेक्स नहीं करुँगी तो ये सबको बता देंगे।
मुझसे यह सुनने के बाद यश चुप हो गया, वैसे भी वो कुछ बोल नहीं सकता था।
इसके बाद हमने अपना खेल शुरू किया। आज के दिन मैं उन सबकी मालकिन थी और वो लोग मेरे कुत्ते ! वो मेरी हर बात मान रहे थे, मैंने दो लोगों को अपना एक-एक पाँव चाटने के लिए दो लोगों को अपना एक-एक हाथ चाटने के लिए दे दिया। वो लोग ऐसे चाट रहे थे जैसे कोई केंडी चाट रहे हों, कपिल अपना लंड निकाल कर मेरे कन्धों पर मार रहा था और राजीव मेरे होंठों को चूमने में लगा हुआ था।
बाकी बचे हुए दो लोग मेरा एक-एक चुच्चा मेरी नाईटी के ऊपर से ही दबा रहे थे। काफी देर तक जगह बदल-बदल कर वो मुझे चाटते रहे और मैं भी अपने आपको चटवाने का मजा लेती रही।
इसके बाद संजय ने मेरी नाईटी उतारी और सभी ने मेरी ब्रा के ऊपर हमला बोल दिया मैंने उन्हें रोका और खुद ही अपनी ब्रा और पेंटी
उतार कर नंगी ही यश की तरफ बढ़ी। सभी अपना-अपना लंड हिलाकर मेरा इन्तजार कर रहे थे। मैंने जाकर यश का सर अपनी चूत में दबा दिया और चाटने को कहा।
यश भी सब कुछ भूल गया और मेरी चूत चाटने लगा तो मैंने भी यश को खोल दिया। उस वक्त उस कमरे में 9 लड़के थे और मैं एक अकेली लड़की।
यश ने भी अपने कपड़े उतार दिए और वो भी हाथ में लौड़ा लेकर मेरी चूत मारने के लिए तैयार हो गया। इतने लड़कों को देखकर एक बार के लिए तो मैं घबरा गई, लेकिन तभी दिमाग में एक और शरारत आई, मैंने उन सबको बताया- सेक्स मैं पहले भी कर चुकी हूँ इसलिए मैं चाहती हूँ कि तुम सब लड़के मिलकर मेरा रेप करो।
मेरी बात सुनकर सबके चेहरे पर एक कातिलाना हंसी आ गई। मैं भी एक बेचारी लड़की का अभिनय करने लगी और नंगी ही कमरे से भागने लगी, यश ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और पीठ के बल घसीटते हुए मुझे बिस्तर पर लाकर पटक दिया, इसके बाद संजय ने अपना लंड मेरे मुंह में घुसा दिया, सुमित ने मेरे दोनों हाथ कस कर पकड़ लिए और राजीव ने मेरे दोनों पाँव, कपिल अपना लंड लाकर मेरी चूत पर रगड़ने लगा, बचे हुए छ: लोग मेरी चूत मारने के लिए लड़ाई करने लगे, मैं भागने के लिए झटपटा रही थी।
राजन ने सबसे पहले अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया फिर भी मैं बेचारी लड़की की तरह छटपटाई और भागने की कोशिश करने लगी।
राजन और योगेश दोनों ने अपना लंड एक साथ मेरी चूत में घुसा दिया एक साथ दो लौड़े अपनी चूत में महसूस कर मेरी आह निकल गई। मैंने संजय से हटने के लिए कहा मगर वो भी मेरी सुनने को तैयार नहीं था। सभी बारी बारी से मेरी चूत में अपना लंड घुसा रहे थे
और जब कोई झड़ने को होता तो मेरे मुंह में अपना लेस झाड़ देते और तब तक मेरे मुंह में अपना लौड़ा रखते जब तक कि दुबारा खड़ा ना हो जाये।
इसके बाद उन सभी ने मुझे उठाया और टिंकू निचे लेट गया और नीचे से ही मेरी गांड में अपना लंड डाल दिया। इसके बाद सबने अपनी अपनी जगह ले ली मेरे दोनों हाथों में दो-दो लौड़े थे, एक गांड में, एक मुंह में, दो चूत में और एक अपना पानी मेरे मुंह पर झाड़ रहा था।
काफी देर तक जगह बदल-बदल कर वो मुझे चोदते रहे।
थोड़ी देर में मुझे लगा कोई मेरी चूत में कुछ मोटा सा कुछ घुसा रहा है, मैं देखती इससे पहले ही उन्होंने मेरी चूत में एक घिया और गाण्ड में एक मूली एक साथ घुसा दी, मेरी चूत पूरी खुली हो चुकी थी और मुझ में अब संघर्ष की ताकत नहीं बची थी। वो एक-एक करके कभी घिया कभी तोरई तो कभी डंडा तो कभी लंड घुसा रहे थे। इस तरह उन लोगों से सब कुछ मेरी चूत और गांड में घुसा कर देख लिया।
मेरे साथ उन लोगों ने कई राउंड लिए और मुझे तरह-तरह से रौंदा, मेरी चूत का उन्होंने मिलकर पूरा भौसड़ा बना दिया, अब मैं खड़ी होने लायक हालत में नहीं थी। उन सबने मिलकर मुझे उठाया और बाथरूम में ले जाकर मुझे नहलाया और वहाँ भी मुझे काफी रगड़ा और मेरी हालत पर बिल्कुल भी रहम नहीं खाया और वहाँ भी कई बार मुझे चोदा।
इसके बाद हम सब जाकर सो गए, अगले दिन सुबह मेरी आँख सुबह 11 बजे खुली। जब मैं उठी तो उन्होंने सबके लिए खाने का आर्डर दिया और उसके बाद हम सभी ने खाना खाया।
इसके बाद वो बचे हुए तीन दिनों तक मुझे चोदते रहे और वो भी पूरी बेरहमी के साथ।
जब हम वापिस आ रहे थे तो मैं उन सबसे कहा- ये हम सबने एक साथ आखिरी बार सेक्स किया था। अब मेरी शादी होने वाली है इसलिए आज के बाद हम मिल सकते हैं लेकिन एक-दूसरे के साथ सेक्स नहीं करेंगे।
इस पर वो मान गए।
करीब 3 महीने बाद मेरी और वाणी की शादी हो गई, अपने साथ ग्रुप सेक्स की बात मैंने वाणी को भी नहीं बताई। यश और उसके दोस्तों ने मुझे अपनी बहन की तरह विदा किया और उसके बाद आज तक उन्होंने मुझसे सेक्स की बात तक नहीं की।
शादी के बाद क्या-क्या हुआ, यह मैं जरूर लिखूँगी तो इन्तजार कीजिये अगली कहानी का।
मेरे पास कई मेल्स आये, उनमें काफी सारे लोग मेरे साथ सेक्स करना चाहते हैं, तो मैं बता दूँ सेक्स के लिए लड़के मैं चुनती हूँ और मैं सिर्फ पैसों के लिए सेक्स नहीं करती, यह आप जान जायेंगे आगे की कहानियाँ पढ़ने के बाद।
कुछ लोग जानना चाहते थे मैं कहा रहती हूँ तो मैं दिल्ली में रहती हूँ।
आप लोगों को मेरे जीवन का ये हिस्सा कैसा लगा जरूर बताइयेगा।
अगली कहानी का इन्तजार कीजिये।
यह कहानी आपको कैसी लगी, जरूर बताइए।

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मैं अपनी कहानी आगे बढ़ाती हूँ, शादी के वक्त मैंने सोच लिया था कि मैं शादी के बाद साहिल का पूरा साथ दूंगी, और उसके साथ कोई धोखा नहीं करुँगी। शादी के बाद मैं तरह-तरह के सपने देख रही थी क्योंकि साहिल दिखने में काफी सुन्दर है और काफी हष्ट-पुष्ट भी मगर शादी के बाद पहले दिन ही मेरे सारे सपने टूट गए क्योंकि साहिल का लौड़ा खड़ा होने के बाद मुश्किल से 5 इंच का है और जो लड़की 8-9 इंच का लौड़ा ले चुकी हो उसको 5 इंच में क्या मजा आएगा।
लेकिन मैंने कोई शिकायत नहीं की। पहली रात को जब साहिल मेरे कमरे में दाखिल हुआ तो वो काफी घबराया हुआ था, उसने जूस का ग्लास जो कि बेड के एक तरफ रखा हुआ था पी लिया। इसके बाद उसने अपनी शर्ट और पैंट उतारी और मेरी तरफ बढ़ा। मेरी साँसें बहुत तेजी से चल रही थी और मैं भगवान से दुआ कर रही थी कि कम से कम इसका लंड 7-8 इंच का निकले। वैसे तो साहिल शरीफ था मगर एक लड़की शराफत के सहारे जिंदगी नहीं काट सकती। उसने एक-एक करके मेरे सारे कपड़े उतार दिए, मैं नंगी थी और अपने हाथों से अपने उरोज ढकने की नाकाम कोशिश कर रही थी। मुझे इस अवस्था में देखकर साहिल उत्साहित हो गया और अपनी अंडरवियर उतार कर मैदान में उतर आया।
उस वक्त तक मेरी नजर उसके लंड पर नहीं गई थी, मैं तो अपने सपनों की दुनिया में खोई हुई थी। साहिल मेरे होंठों पर उंगली फेरने लगा और धीरे-धीरे करके वो मेरे होंठों की तरफ बढ़ा और कब उसके होंठ मेरे होंठों से चिपक गए मुझे पता ही नहीं चला।
उसने अपने बाएं हाथ से मेरे सर के बाल पकड़े थे और दूसरे हाथ से मेरे चुच्चे मसल रहा था, मैं उत्तेजनावश आआ आह आआ आआ आआह कर रही थी, मैं साहिल का लंड लेने के लिए उत्साहित थी। इससे पहले कि वो मेरी चूत में अपना लंड डालता, वो स्खलित हो गया और उसका खड़ा लंड बैठ गया। लंड बैठने के बाद वो मेरे ऊपर से हट गया।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो वो बोला- आज नहीं कर सकता !
मैंने अपनी सारी शर्म उतार फेंकी और उसका लंड पकड़ कर अपने मुंह में ले लिया, मेरी उत्तेजना को साहिल फिर भी नहीं समझ पाया
और मेरे मुंह में लेने के बाद भी उसका लंड 5 इंच तक ही खड़ा हो पाया।
5 इंच के लंड को वो अपनी मर्दानगी समझ रहा था और वो लौड़ा उसने मेरी चूत में डाल दिया। चूँकि मेरी चूत पहले ही 8-9 इंच के लौड़े खा चुकी थी तो उसका लौड़ा एक ही बार में मेरी चूत में प्रवेश कर गया और मुझे बिल्कुल दर्द नहीं हुआ। लेकिन फिर भी मैं एक बार चिल्ला उठी ताकि उसे कोई शक ना हो।
दूसरी सुबह मेरी दोनों ननदें मुझे और वाणी को छेड़ने लगी, जिससे मुझे गुस्सा आ गया और मैंने अपनी ननदों को खूब गाली सुनाई, इसके बाद वो पूरे दिन मेरे आस-पास भी नहीं फटकी।
यह शीघ्र-स्खलन का सिलसिला रोजाना चलने लगा, जिसके कारण मैं उदास रहने लगी।
वाणी जो मेरी देवरानी थी और मेरी कजन और अच्छी दोस्त भी, उसने मुझसे इसका कारण जानना चाहा तो मैंने उसे सब बता दिया तो वो उसने बताया कि उसके पति गौरव का लंड 7 इंच का है और वो गौरव से खुश है।
मैं वाणी के नसीब से जलने लगी।
शादी के दो महीने बाद ही मेरी सास की मृत्यु हो गई और मुझ पर घर की सारी जिम्मेदारी आ गई क्योंकि मैं घर की बड़ी बहू थी, पत्नी की मौत के बाद ससुर जी भी काम में ध्यान नहीं दे पा रहे थे जिसकी वजह से हमें बिजनेस में बहुत बड़ा नुकसान हो गया।
एक दिन की बात है जब घर पर मैं, साहिल और मेरे ससुर जी ही थे। उन्होंने अपने एक पार्टनर मोहसिन को घर पर ही बुलाया था, वैसे तो वो आदमी 40-45 के आस-पास का था मगर फिर भी काफी फिट था।
ससुरजी ने मुझे चाय लाने को बोला। जब मैं चाय रख रही थी, तभी मेरी साड़ी का पल्लू नीचे सरक गया और मेरे बूब्स उसके सामने आ गए और उसकी नजरें मेरे चुच्चों पर गड़ गई। मैंने जल्दी से अपने आपको संभाला और ट्रे लेकर चुपचाप वहां से चली गई। वो तीनों बैठकर काफी देर तक बातें करते रहे और फिर तीनों वहाँ से चले गए।
अगली सुबह मैंने ससुरजी, गौरव और साहिल को बातें करते सुना कि यह डील हमारे लिए बहुत ही जरुरी है क्योंकि पहले ही हमको बहुत नुकसान हो चुका है। कुछ देर बाद ही तीनों ऑफिस चले गए, मेरी दोनों ननदें पहले ही कॉलेज जा चुकी थी, मैं और वाणी ही घर पर थे। करीब 10 बजे वाणी मेरे कमरे में आई और ब्यूटी पार्लर चलने का पूछा। मैंने मना कर दिया क्योंकि मैं भी घर की परिस्थितियों के कारण तनाव में थी।
कुछ ही देर में घर के फोन की घंटी बजी, नौकरानी ने फोन उठाया और बोली- ‘मैडम’ आपके लिए फोन है।
मैंने फिर जाकर कॉल रिसीव की तो सामने से आवाज आई, क्या तुम मुझसे मिल सकती हो?
मैंने जब नाम पूछा तो उसने बताया- वही जिससे तुम सुबह मिली थी।
मैं समझ गई कि मोहसिन का फोन है, मैंने मोहसिन को साफ़ मना कर दिया तो उसने डील तोड़ने की धमकी दी।
तो मैंने मिलने के लिए हाँ कह दी। उसने मिलने के लिए अपने घर बुलाया। मैं नौकरानी को कुछ देर में आने का बोलकर मोहसिन के घर चल दी, जब मैं उसके घर पहुँची तो देखा घर पर कोई नहीं था मोहसिन के अलावा।
मैंने मोहसिन से बुलाने का कारण पूछा, तो उसने मेरे साथ छेड़छाड़ करनी शुरू कर दी। सबसे पहले उसने मेरे होंठों को बंद करने के लिए अपने होंठ मेरे होंठों से लगा दिए। मैं जब मोहसिन के घर आई थी मुझे पता था कि यहाँ क्या होगा, और मैं इसके लिए तैयार भी थी पर मैंने चिल्लाना शुरू कर दिया लेकिन आवाज वहाँ से बाहर नहीं जा रही थी।
मैंने अपने आपको को बचाने की कोशिश की मगर मैं अपने आपको को नहीं बचा पाई। कुछ ही देर की मशक्कत के बाद उसने मुझे अधनंगी कर दिया और अपने कपड़े उतारने लगा। मैंने उससे बहुत विनती की मगर वो अपने कपड़े खोलने लगा और आखिर में अपनी अंडरवियर तक उतार दी।
उसका लंड देखकर मैं थोड़ी देर के लिए बहक गई और मेरे मन में भी कामवासना जागृत हो गई, मगर जब मैंने उसे अपनी तरफ बढ़ता पाया तब मुझे साहिल की याद आई और मुझे याद आया कि मैं शादीशुदा हूँ, मैंने अपनी पूरी ताकत के साथ उसका विरोध शुरू कर दिया।
मेरी सहमति ना पाते देख उसने मुझे छोड़ दिया और मुझे वहाँ से जाने को बोला। मैंने अपने कपड़े समेटे और वहां से वापिस घर चली आई।
अगली सुबह मुझे पता चला कि मोहसिन ने सच में डील तोड़ दी और हमारी हालत बहुत खराब हो गई थी। मैंने पापा को फोन पर सारी बात बता दी। उसी दिन पापा हमारे घर आये और उन्होंने कुछ रूपए देने कि पेशकश की जिसे मेरे ससुरजी ने ठुकरा दिया और पापा को वहाँ से जाने को बोला।
पापा ने इसे अपनी बेइज्जती समझा और कभी ना आने का बोलकर वहां से चले गए। हजारों कहानियाँ हैं अन्तर्वासना पर !
पूरी दिन-रात सभी घरवाले इस बारे में सोचते रहे मगर कोई समाधान नहीं मिला।
आखिर में ससुरजी ने अपनी गाँव की जमीन बेचने का निर्णय लिया जो कि सभी ने मान लिया, मैंने भी सरकारी नौकरी के लिए हाथ पाँव मारने शुरू किये, और मेरी सरकारी नौकरी भी लग गई, मुझे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में नौकरी मिली, जिसे सभी ने सराहा।
लेकिन मुझे दिल्ली से जयपुर जाना पड़ा और बिजनेस के कारण साहिल मेरे साथ नहीं जा सकते थे और ससुरजी ने मेरी मेहनत की इज्जत करते हुए मुझे जयपुर शिफ्ट होने की इजाजत दे दी।
वाणी ने भी कोई नौकरी पकड़ ली, 2 ही साल में सब कुछ पटरी पर आ गया। इसके बाद वाणी ने भी नौकरी छोड़ दी, हमारा बिजनेस भी दुबारा अच्छे से चलने लगा।
मेरी दोनों ननदों रेखा और आरती, दोनों को ससुरजी ने मेरे साथ भेज दिया ताकि उनका अच्छे से ख्याल रखा जा सके और जयपुर दिल्ली से ज्यादा दूर नहीं इसलिए वे कभी भी आ-जा सकती थी। मुझे भी विचार अच्छा लगा।
कुछ दिनों तक जयपुर में सब अच्छा चला, मगर एक दिन जब मैं अपने घर पर बैठी थी तभी पुलिस स्टेशन से फोन आया और मुझे तुरंत आने को कहा। वहाँ पहुँचकर मैंने इंस्पेक्टर से बुलाने का कारण पूछा तो वो मुझसे बदतमीजी से बात करने लगा।
लेकिन जैसे ही मैंने बताया कि मैं इनकम टैक्स इंस्पेक्टर हूँ तो वो मैडम मैडम करके बात करने लगा। इसके बाद उसने बुलाने का कारण बताया जिसे सुनकर मैं दंग रह गई। इंस्पेक्टर ने बताया कि रेखा और आरती दोनों धंधा करते हुए रंगे हाथों पकड़ी गई हैं।
मैंने उसकी इस बात पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और अपने रुतबे और कुर्सी का इस्तेमाल करते हुए रेखा और आरती को छुड़ा लिया और इंस्पेक्टर से एफ.आइ.आर दर्ज ना करने का वादा लिया और अपनी ननदों के साथ वापिस अपने घर आ गई।
पूरे रास्ते मैं और वो दोनों खामोश रही।
जैसे ही हम तीनों घर में घुसी, वो दोनों फ़ूट-फ़ूट कर मेरे सामने रोने लगी, मैं बहुत गुस्से में थी लेकिन मैंने अपने आपको संभाला और इस तरह का काम करने का कारण जानना चाहा तो बोली- भाभी हमें रोजाना आपसे पैसे मांगने में शर्म आती थी, इसलिए हमने यह रास्ता चुना।
मैं उन्हें कुछ बोल ही नहीं सकी, मैंने उन्हें अपने बीते हुए कल के बारे में बताना उचित नहीं समझा।
मैंने उन दोनों को घर बिठा दिया और अपने रोजाना के कामों में लग गई। चूँकि मेरी ट्रेनिंग पूरी हो चुकी थी, लेकिन मुझे 3 साल तक प्रमोशन नहीं मिल सकता था। मैंने अपने सीनियर के चक्कर मारने शुरू कर दिए, उन्होंने मुझे बोला कि इंडिया में कुछ भी हो सकता है बस कीमत पता होनी चाहिए।
मुझे लगा कि वो पैसे कि मांग रखेंगे तो मैंने उन्हें कह दिया- सर, मैं कुछ भी देने को तैयार हूँ।
इस पर उन्होंने मुझसे शाम को 5 बजे के बाद मिलने को कहा, शाम को 4 बजे मेरे पास फोन आया और उन्होंने मुझे एक होटल में बुलाया।
जब मैं वहाँ पहुंची तो कुल मिलकर वहाँ चार लोग बैठे हुए थे जो सारे मेरे सीनियर थे। जैसे ही मैं वहां पहुँची तो उन लोगों ने मुझे बीयर ऑफर की जिसे मैंने तुरंत स्वीकार कर लिया। इस पर उनमें से एक मिस्टर बी. दास ने मुझे सिगरेट ऑफर की, जब मैं मना करने लगी तो वो बोले- अपने सीनियर को मना करती हो, प्रोमोशन नहीं चाहिए क्या?
मैं समझ गई कि मुझे प्रोमोशन के लिए कम्प्रोमाईज करना पड़ेगा। मैं भी उनके साथ सिगरेट के कश लेने लगी, आने-जाने वाले लोग
मुझे घूर-घूरकर देख रहे थे क्योंकि जयपुर के लोगों की मानसिकता अभी ज्यादा उदार नहीं है और वहाँ अभी भी औरतों को पिछड़ा हुआ समझा जाता है।
एक आदमी जिसका नाम रमेश था वो मुझे घूर-घूरकर देख रहा था, मैंने समझ गई कि उसे क्या चाहिए।
मैंने बी दास जो सबसे सीनियर था, से पूछा- सर ! मुझे प्रोमोशन के लिए क्या करना होगा?
वो बोला- कुछ नहीं, बस हमें खुश कर दो, बस फिर प्रोमोशन और फिर पैसा ही पैसा। तुम जिंदगी भर मजे कर सकती हो।
मैंने पूछा- सर ! आपको खुश करने के लिए क्या करना होगा?
तो दास बोला- तुम बहुत भोली हो, इतना भी नहीं समझती आदमी कैसे खुश होते हैं।
मैंने कहा- सर ! मैं शादीशुदा शरीफ औरत हूँ और अब तो मैं माँ बनने वाली हूँ।
माँ वाली बात झूठ बोल दी।
इस पर दास हंस पड़ा और बोला- तुम कच्ची हो, एक साल से पति से नहीं मिली और बोलती हो शरीफ हूँ, और फिर भी माँ बनने वाली हो।
मैं समझ गई कि मुझे सीधी बात करनी चाहिए, मैंने कहा- सर ! मैं यह काम नहीं कर सकती मगर आपके लिए लड़की का इंतजाम कर सकती हूँ।
तो वो बोले- लड़की अगर फ्रेश और खानदानी हो तो मजा आ जाए।
मैंने कहा- सर मेरी अपनी दो ननदें है, दोनों कच्ची हैं, सील भी नहीं टूटी !
एक और झूठ।
इस पर दास ने पूछा- उनकी उम्र कितनी है?
तो मैंने उनकी उम्र 19 और 21 बता दी।
इस पर दास खुश हो गया और बोला- तुम उनको मनाओगी कैसे?
मैंने कहा- सर, वो मेरा काम है।
मीटिंग के बाद मैं घर पहुँची तो रेखा और आरती दोनों टी.वी. देख रही थी।
मैंने उन दोनों से कहा- तुम दोनों जो धंधा करती थी, वो काम अभी भी परेशान कर रहा है। पुलिस के कुछ आदमी मान नहीं रहे, मैंने बहुत कोशिश की, मगर मामला बहुत आगे निकाल चुका है, मैंने मनाने की कोशिश की तो वो बोले अगर तुम दोनों उनसे चुदने के लिए तैयार हो जाओ तो वो संभाल लेंगे, वर्ना तुम दोनों को तीन साल की जेल और जिंदगी भर रंडियों का ठप्पा और फिर तुम्हारी शादी भी नहीं होगी और परिवार की भी बदनामी अलग से।
इस पर दोनों डर गई और डर के मारे एक-दूसरे को देखने लगी। यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉम पर पढ़ रहे हैं।
मैंने कहा- यह सोचने का समय नहीं है, तुम दोनों आज रात को तैयार हो जाना बस चार लोग ही हैं, यह आखिरी बार होगा, मैं वादा करती हूँ कि इसके बाद मैं तुम दोनों की शादी करवा दूँगी और तुम दोनों अपनी जिंदगी में सेटल हो जाओगी, किसी को पता भी नहीं चलेगा।
जैसा मैंने सोचा था वही हुआ, दोनों तैयार हो गई चुदने के लिए।
मैंने दास को फोन करके बता दिया, आज मुझे वो काम सिखाना था जो श्वेता ने मुझे सिखाया था, रंडियाँ कैसे अपने ग्राहकों को खुश करती हैं। मैंने दोनों से तैयार होकर आने के लिए कहा, दोनों टी-शर्ट और जींस पहन कर आ गई, मैंने दोनों के गालों पर एक-एक तमाचा जड़ दिया, दोनों हक्की-बक्की रह गई क्योंकि मैंने ऐसा उनके साथ पहले कभी नहीं किया था।
मैंने कहा- तुम लोग तो धंधा करती थी तो ग्राहकों को खुश कैसे करती थी?
तो रेखा बोली- हम तो बस ऊपर के मजे देती थी, हमने कभी चूत नहीं चुदाई।
मैं खुश थी क्योंकि मैं जिसे झूठ समझ रही थी वो तो सच निकला, दोनों अभी तक कुंवारी थी। मैंने दोनों से नंगा होने के लिए कहा,
दोनों शरमा गई और सर झुका कर खड़ी हो गई।
मैंने कैंची निकली और दोनों की टी-शर्ट काट-फाड़ डाली और दोनों की ब्रा भी खोल दी।
मैंने दोनों के एक-एक तमाचा और जड़ दिया, इसके बाद वो दोनों खुद ही नंगी हो गई। मैंने दोनों से एक-दूसरे की चूचियाँ चूसने को कहा ।
इस पर वो दोनों उत्तेजित दिखाई दी और एक-दूसरे के मम्मे चूसने लगी।
मैंने कहा- तुम दोनों यही करती रहो, मैं अभी आती हूँ।
मैं जाकर मार्केट से 5 सेक्सी सी नाईटी और 4 सिगरेट के पैकेट ले आई। जब मैं वापिस आई तो देखा आरती रेखा की चूत में मूली डालने की कोशिश कर रही थी।
मैं समझ गई कि दोनों मुझसे ज्यादा तेज हैं और मुझे कुछ सिखाने की जरुरत नहीं।
मेरी आवाज सुनते ही दोनों अलग हो गई।
मैंने कहा- तुम आज रात को ये नाईटी पहनोगी।
तो रेखा बोली- भाभी, यह सिगरेट किसके लिए है?
तो मैंने कहा- यह तुम्हारे लिए है।
तो उन्होंने बताया कि उन्हें सिगरेट पीनी नहीं आती।
इस पर मैंने एक सिगरेट निकाली और कश के मजे लूटने लगी। मेरे इस अवतार को देखकर पहले तो दोनों चौंकी। फिर नॉर्मल हो गई। इसके बाद मैंने दोनों को सिगरेट पीनी सिखाई और दोनों अलग-अलग और बड़े ही कामुक अंदाज में सिगरेट पीना सीख गई, ड्रिंक तो वो पहले ही करती थी, तो मेरा काम पूरा हो गया था।
रात को करीब 10 बजे चारों मेरे घर पहुँच गए, मैंने एक कमरे में स्प्रे मार रखा था जिससे पूरा कमरा महक रहा था।
आते ही उन्होंने पूछा- लड़कियाँ कहाँ हैं?
मैंने उनसे पहले बैठने को कहा। चारों उस कमरे में बैठ गए और रेखा और आरती का इन्तजार करने लगे।
फिर मैंने रेखा और आरती को बुलाया और सब कुछ समझा दिया। सबसे पहले मैंने रेखा को अंदर जाने को कहा, मैं दरवाजे पर ही खड़ी हो गई ताकि कोई भी परेशानी हो तो मैं संभाल लूँ क्योंकि दोनों पहली बार चुद रही थी वो भी मेरे प्रोमोशन के लिए।
रेखा ने गुलाबी रंग की पारभासी नाईटी पहन रखी थी, रेखा को देख चारों बुड्ढों के लौड़े उछल पड़े और फनफनाने लगे।
अंदर घुसने के बाद रेखा ने अपनी नाईटी में से एक सिगरेट निकली और जलाकर कश लेने लगी। रेखा बहुत ही अच्छे तरीके से कर रही थी जिसे देखकर मुझे भी जलन हो रही थी।
इसके बाद अपनी सिगरेट रेखा ने मोहन को दे दी, जिसे उसने वर्ल्ड कप समझ कर ले लिया इसके बाद मैंने आरती से अंदर आने को बोला, आरतींए कमरे में घुसते हुए ही अपनी नाईटी उतार दी, उसके चुचे बड़े शानदार थे और बहुत बड़े थे। आरती के इस नज़राने को देखकर वो अपने ऊपर कण्ट्रोल नहीं कर सके और उनमें से दो ने रेखा को उठाया और बिस्तर पर फेंका और बाकी दो आरती को खड़े-खड़े ही लूटने लगे। रेखा के ऊपर दास और मोहन चढ़े।
मोहन बहुत जल्दी में था, उसने रेखा की नाईटी फाड़ दी और अपना लंड निकाल कर हिलाने लगा, मैंने रेखा को इशारा करके चूसने को बोला। इस पर रेखा ने मुंह बना लिया और बोली- मैं लौड़ा नहीं चूसूंगी।
मैं कुछ बोलती इससे पहले ही दास बोला- कोई बात नहीं मेरी रानी ! हम तो तेरी चूत चाट सकते हैं।
इसके बाद मोहन ने रेखा के होंठ अपने होंठो से और दास ने रेखा की चूत अपने मुंह से बंद कर दी।
बाकी दोनों आरती के चुचे चूसने में मस्त थे। काफी देर की चुसम-चुसी के बाद दोनों के चुदने का नंबर आया।
आरती ने कहा- मैं सबके लौड़े चूसना चाहती हूँ।
इसके बाद सबने रेखा को साइड कर दिया और आरती एक-एक करके सबके लौड़े चूसने लगी। आरती को देखकर रेखा ने भी लौड़ा चूसने के लिए हाँ कह दी। और अब चूसने की बारी लड़कियों की थी और चुसवाने की बुड्ढों की।
मेरा ध्यान रेखा की तरफ था, तभी मुझे आरती की आवाज आई, मैंने देखा तो मोहन का लंड आरती की चूत के अंदर घुस चुका था। आरती की आआह आअह आआ आ आह से पूरा कमरा गूँज उठा था।
मोहन अपना लंड आरती की चूत में आगे-पीछे कर रहा था, इतने में कमल ने जगह ली और हल्के-हल्के झटके लेकर आरती की गांड में भी लंड घुसा दिया। आरती अब पूरी तरह पैक थी। रेखा भी अब तक चूत और गांड भरवा चुकी थी। चूँकि चारों की उम्र ज्यादा थी फिर भी करीब 15 मिनट तक वो लोग उनकी छेद चोदते रहे। उसके बाद वो लोग स्खलित हो गए और दोनों लड़कियों ने बारी-बारी से चारों के लंड चूस कर साफ़ किये।
इसके बाद मैंने दोनों को वहीं लेटा छोड़ा और चारों के साथ बाहर आ गई, चारों ने मुझे अगले ही दिन प्रोमोशन लैटर का वादा किया। इसके बाद मैंने चारों को एक-एक किस दिया और उसके बाद वो चारों वहाँ से चले गए।
इसके बाद मैं अंदर आई तो देखा कि दोनों अपने कपड़े पहन चुकी थी।
मैंने पूछा- कैसा लगा?
दोनों बहुत खुश थी और बोली कि वो दोनों फिर से चुदना चाहती है।
मैंने कहा- फिर ठीक है, तुम्हारी शादी अभी 3-4 साल बाद करेंगे, अभी तुम लोग जिंदगी के मजे लो।
मैंने दोनों को 10-10 हजार पकड़ाए और दोनों ने मार्केट जाकर शॉपिंग की।
इस तरह मेरी ननदें इस धंधे से जुड़ी।
आगे पढ़िए कि मैंने उन्हें और किन-किन लड़कों से चुदवाया और कितने पैसे कमाए। इसके बाद वाणी और गौरव को कैसे इस खेल में शामिल किया।
आपको मेरी जीवन का यह हिस्सा कैसा लगा जरूर बताइयेगा।
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यौवन तरस गया है अब मेरा,
तेरी चाहत में मिट जाने को,
तू ना आया मोरे सजना,
मैं ताकूँ तेरी रहिया तोरे आने को,
पसरी हैं मोरी बहियाँ तोरे सुआगत को !
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जब से दूर गये तुम मोरे सजना,
खो बैठी मैं अपना हर सपना,
तू जल्दी घर आ जा सजना,
घर का आंगन है सूना अपना !
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दिन दिन तुझे अपनी गीतों में पुकारूँ,
रात अकेली मर मर के गुजारूँ,
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कैसे कहूँ किस से कहूँ,
कि तू है दिया मेरी जीवन का,
तेरे बिन मोरा जीवन लागे,
प्राण बिना ज्यों मूरत सोने का,
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मैं करती हूँ प्यार तोही से,
है मेरा शृंगार तुम्ही से,
तुम बिन खोई मैं अंधियारी में,
आजा साजन इस फगुआरी में..
यौवन तरस गया है अब मेरा,
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तेरी चाहत में मिट जाने को,
तू ना आया मोरे सजना,
मैं ताकूँ तेरी रहिया तोरे आने को,
पसरी हैं मोरी बहियाँ तोरे सुआगत को !
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